इस मंदिर में मां काली पीती हैं ढाई प्याले मदिरा, एक बूंद भी नहीं गिरती नीचे



राजस्थान में कई शक्तिपीठ अपने चमत्कारों की वजह से प्रसिद्ध हैं। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु माता के दरबार में शीश झुकाकर उनके चमत्कार को नमस्कार करते हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध व अनोखा शक्तिपीठ राजस्थान के नागौर जिले की रियां तहसील में स्थित है।
इस लेखमाला में पढ़िए मां के मंदिर की कहानी और ढाई प्याले मदिरा चढ़ाने का राज। सबसे आखिरी स्लाइड जरूर पढ़िए, जिसमें बताया गया है कि माता ने पाकिस्तान में भी अपने एक भक्त की जान बचाई थी।
क्या है उस मंदिर की खासियत, :-
यहां माता भवाल विराजमान हैं जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से भुवाल और भंवाल के नाम से भी पुकारते हैं। यहां मां के 2 स्वरूप हैं - काली और ब्रह्माणी। दोनों स्वसृजन से उत्पन्न हुई हैं यानी उनका निर्माण किसी ने नहीं किया। वे स्वयं की शक्ति से प्रकट हुई हैंमां काली और ब्रह्माणी के अद्भुत चमत्कार हैं। ब्रह्माणी देवी को यहां फल या मिठाई आदि का प्रसाद अर्पित किया जाता है लेकिन मां काली को उनके भक्त मदिरा चढ़ाते हैं। जिसे मां तुरंत स्वीकार भी कर लेती हैं। मदिरा चढ़ाने का तरीका भी बहुत रहस्यमय है।
क्या है वो रहस्य,:-
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे मां से कोई मन्नत मांगते हैं तो वे उसे जरूर पूरा करती हैं। इस उपलक्ष्य में जब उन्हें मदिरा चढ़ाई जाती है तो इसका भी एक नियम है। श्रद्धालु ने जितनी प्रसाद चढ़ाने की मन्नत मांगी है, मां को उतने ही मूल्य का प्रसाद चढ़ाना होता है। न कम और न ज्यादा।
कहा जाता है कि बोले गए प्रसाद से थोड़ा भी कम मूल्य का प्रसाद मां ग्रहण नहीं करतीं। मां के मंदिर में चमड़े से बनी कोई भी वस्तु ले जाने का निषेध है। मां को मदिरा का प्रसाद चढ़ाने के लिए पुजारी चांदी के प्याले में मदिरा लेता है और उनके होठों से लगाता है।
लेकिन इस दौरान पुजारी नहीं करता ये काम,:-
इस दौरान वह प्याले की ओर नहीं देखता। नीचे माता की ज्योति जलती रहती है। फिर वह ज्योति पर प्याले को उल्टा कर देता है। अगर माता ने मदिरा का प्रसाद स्वीकार कर लिया है तो उसकी एक बूंद भी नीचे नहीं गिरती। इस प्रकार माता को चांदी के ढाई प्याले मदिरा के चढ़ाए जाते हैं और वे उसे ग्रहण करती हैं।
 कैसे प्रकट हुईं मां कालका और ब्रह्माणी:-
मंदिर के इतिहास के बारे में श्रद्धालुओं का कहना है कि भक्तों की पुकार पर भंवाल मां प्राचीन समय में भंवालगढ़ गांव (जिला नागौर) में एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे पृथ्वी से स्वयं प्रकट हुईं। मां ने भक्तों को संकेत दिया कि वे दोनों बहनें कालका व ब्रह्माणी के रूप में आई हैं लेकिन उनका मूल स्वरूप एक ही है।

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